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Showing posts from April, 2023

72 जिनालय भीनमाल

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72 जिनालय   तीर्थस्थल भीनमाल से लगभग 6 किलोमीटर दूर बनाया गया है। 80 एकड़ भूमि में फैले हुए यह तीर्थयात्रा के साथ-साथ यात्रियों को अस्थायी धर्मार्थ विश्राम गृह भी प्रदान करता है। यह पूरी तरह से संगमरमर में बनाया गया है और इसलिए एक शानदार दृश्य प्रदान करता है। निर्माण पर किया गया काम बहुत जटिल है। सभी विवरणों और रंगों को बहुत बारीकी से उकेरा गया है।  इस तीर्थ (तीर्थयात्रा) का निर्माण   1982 में शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में लगभग 19 साल लगे। मंदिर 4700 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर को 8 फीट ऊंचे मंच की मदद से ऊंचा किया गया है।   मुख्य मंदिर केंद्र में है   (इसमें मुलनायक, मुख्य देवता शामिल हैं) और यह 72 अन्य छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। इस मंदिर के मूलनायक भगवान महावीर हैं। उनकी प्रतिमा मुख्य मंदिर में रखी गई है जो 72 x 54 x 60 फीट के आयामों में है।  अन्य 80 एकड़ क्षेत्र विशाल गार्डन और आगंतुकों / यात्रियों के लिए एक बड़ा धर्मार्थ परिसर है। उस क्षेत्र में फैले कुछ छोटे मंदिर भी हैं।

क्षैमंकरी ( खीमज ) माता मन्दिर भीनमाल

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भीनमाल नगर से  २ किलोमीटर क्षेमंकरी पहाड़ी पर क्षेमंकरी माता का मन्दिर है ।   यही क्षेमंकरी माता अपभ्रंश में खीमज माता कहलाती है । दुर्गा सप्तशती के एक श्लोक अनुसार- “ पन्थानाम सुपथारू रक्षेन्मार्ग श्रेमकरी " अर्थात् मार्गों की रक्षा कर पथ को सुपथ बनाने वाली देवी क्षेमकरी देवी दुर्गा का ही अवतार है ।   भीनमाल खारा मार्ग पर स्थित एक  ऊँची पहाड़ी की शीर्ष छोटी पर बना हुआ है ।  कहा जाता है कि किसी समय उस क्षेत्र में उत्तमौजा नामक एक दैत्य रहता था । जो रात्री के समय बड़ा आतंक मचाता था । उसके उत्पात से क्षेत्रवासी आतंकित थे । उससे मुक्ति पाने हेतु क्षेत्र के निवासी ब्राह्मणों के साथ ऋषि गौतम के आश्रम में सहायता हेतु पहुंचे और उस दैत्य के आतंक से बचाने हेतु ऋषि गौतम से याचना की । ऋषि ने उनकी याचना . प्रार्थना पर सावित्री मंत्र से अग्नि प्रज्ज्वलित की . जिसमें से देवी क्षेमंकरी प्रकट हुई । ऋषि गौतम की प्रार्थना पर देवी ने क्षेत्रवासियों को उस दैत्य के आतंक से मुक्ति दिलाने हेतु पहाड़ को उखाड़कर उस दैत्य उत्तमौजा के ऊपर रख दिया । कहा जाता है कि...

निम गोरिया क्षेत्रपाल भीनमाल

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भीनमाल के स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान की कड़ियों को जोड़ने के क्रम में आज बात करते है भीनमाल शहर के रक्षक निम गोरिया #भैरव देव (खेतलाजी / क्षेत्रपाल) मंदिर की।  भीनमाल (#Bhinmal) के क्षेत्रपाल (खेतलाजी) का मंदिर नगर के सुविख्यात #जाकोब तालाब (जय कूप सरोवर /यक्ष सरोवर) के दक्षिण में स्थित है।  शहर के रक्षक - याने #क्षेत्रपाल #यक्ष और क्षेत्रीय बोलचाल की भाषा में खेतला जी श्री नीमगोरिया भैरव का मूल मंदिर विक्रम संवत 1425 (ईस्वी सन् 1369) में बना था ऐसा यहाँ प्राप्त शिलालेख से प्रमाणित होता है। जन श्रुति के अनुसार #खेतलाजी /निमगोरिया भैरव की प्रतिमा जाकोब तालाब की खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। इस मंदिर में निम गोरिया भैरव देव की मूर्ति एक स्तम्भ के रूप में हैं। जिसके चारों तरफ चार अलग अलग दैवीय छवि उकेरी हुई हैं। इनमे से एक छवि/प्रतिमा श्री नीमगोरिया भैरव क्षेत्रपाल (खेतला जी), दूसरी शक्ति की दैवी #क्षेमंकरी माताजी त्रिशूल रूप में, तीसरा #नाग-नागिन का जोड़ा और चौथे श्री #हनुमान जी हैं ।  इस मंदिर में वर्तमान में एक पंच-लिंगी #शिव भी बिराजित हैं। जिनमे से...