क्षैमंकरी ( खीमज ) माता मन्दिर भीनमाल
भीनमाल नगर से २ किलोमीटर क्षेमंकरी पहाड़ी पर क्षेमंकरी माता का मन्दिर है ।
यही क्षेमंकरी माता अपभ्रंश में खीमज माता कहलाती है । दुर्गा सप्तशती के एक श्लोक अनुसार- “ पन्थानाम सुपथारू रक्षेन्मार्ग श्रेमकरी " अर्थात् मार्गों की रक्षा कर पथ को सुपथ बनाने वाली देवी क्षेमकरी देवी दुर्गा का ही अवतार है ।
भीनमाल खारा मार्ग पर स्थित एक ऊँची पहाड़ी की शीर्ष छोटी पर बना हुआ है ।
कहा जाता है कि किसी समय उस क्षेत्र में उत्तमौजा नामक एक दैत्य रहता था । जो रात्री के समय बड़ा आतंक मचाता था । उसके उत्पात से क्षेत्रवासी आतंकित थे । उससे मुक्ति पाने हेतु क्षेत्र के निवासी ब्राह्मणों के साथ ऋषि गौतम के आश्रम में सहायता हेतु पहुंचे और उस दैत्य के आतंक से बचाने हेतु ऋषि गौतम से याचना की । ऋषि ने उनकी याचना . प्रार्थना पर सावित्री मंत्र से अग्नि प्रज्ज्वलित की . जिसमें से देवी क्षेमंकरी प्रकट हुई । ऋषि गौतम की प्रार्थना पर देवी ने क्षेत्रवासियों को उस दैत्य के आतंक से मुक्ति दिलाने हेतु पहाड़ को उखाड़कर उस दैत्य उत्तमौजा के ऊपर रख दिया । कहा जाता है कि उस दैत्य को वरदान मिला हुआ था वह कि किसी अस्त्र - शस्त्र से नहीं मरेगा । अतः देवी ने उसे पहाड़ के नीचे दबा दिया । लेकिन क्षेत्रवासी इतने से संतुष्ट नहीं थे , उन्हें दैत्य की पहाड़ के नीचे से निकल आने आशंका थी . सो क्षेत्रवासियों ने देवी से प्रार्थना की कि वह उस पर्वत पर बैठ जाये जहाँ वर्तमान में देवी का मंदिर बना हुआ है तथा उस पहाड़ी के नीचे नीचे दैत्य दबा हुआ है ।
देवी की प्राचीन प्रतिमा के स्थान पर वर्तमान में जो प्रतिमा लगी है
वह 1935 में स्थापित की गई है , जो चार भुजाओं से युक्त है । इन भुजाओं में अमर ज्योति . चक्र , त्रिशूल तथा खांडा धारण किया हुआ है । मंदिर में नगाड़े रखे होने के साथ भारी घंटा लगा है । मंदिर का प्रवेश द्वार मध्यकालीन वास्तुकला से सुसज्जित भव्य व सुन्दर दिखाई देता है । मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा के दाई और काला भैरव व गणेश जी तथा बाईं तरफ गोरा भैरूं और अम्बाजी की प्रतिमाएं स्थापित है । आसन पीठ के बीच में सूर्य भगवान विराजित है ।
क्षेमंकरी देवी जिसे स्थानीय भाषाओं में क्षेमज , खीमज , खीवज आदि नामों से भी पुकारा व जाना जाता है ।
भीनमाल के क्षेमकरी माताजी पर 54 फिट बड़ा त्रिशूल लगा हुआ है जिसकी प्रतिष्ठा 10-05-2018 को हुई थी भामाशाह परिवार दिपक जी राजपुरोहित करवाईं थी